नई दिल्ली | 3 मार्च, 2026
Middle East (West Asia) में जारी तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए शांति और बातचीत (Dialogue and Diplomacy) का आह्वान किया है।
नई दिल्ली | 3 मार्च, 2026
पश्चिम एशिया (West Asia) में गहराते युद्ध के बादलों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत का रुख स्पष्ट कर दिया है। पिछले कुछ दिनों से जारी चुप्पी को तोड़ते हुए पीएम मोदी ने सोमवार को कहा कि इस क्षेत्र की स्थिति “गंभीर चिंता का विषय” है और भारत हमेशा से विवादों के शांतिपूर्ण समाधान का पक्षधर रहा है।
‘युद्ध समाधान नहीं, संवाद ही रास्ता’
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के साथ एक संयुक्त प्रेस वार्ता के दौरान पीएम मोदी ने कहा, “भारत शांति और स्थिरता के पक्ष में खड़ा है। हमने हमेशा माना है कि किसी भी विवाद का समाधान केवल ‘डायलॉग और डिप्लोमेसी’ (संवाद और कूटनीति) के जरिए ही निकाला जा सकता है।”
प्रधानमंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद क्षेत्र में तनाव चरम पर है और इजरायल-अमेरिका गठबंधन व ईरान के बीच सीधी सैन्य भिड़ंत शुरू हो गई है।
इजरायली पीएम और खाड़ी देशों के नेताओं से बातचीत
पीएम मोदी ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कई वैश्विक नेताओं से टेलीफोन पर चर्चा की है:
- बेंजामिन नेतन्याहू (इजरायल): पीएम मोदी ने इजरायली प्रधानमंत्री से बात कर जल्द से जल्द शत्रुता समाप्त करने और नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने का आग्रह किया।
- सऊदी अरब और बहरीन: उन्होंने सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और बहरीन के राजा हमाद बिन ईसा अल खलीफा से भी बात की। पीएम ने इन देशों पर हुए हमलों की निंदा की और उन्हें भारत की एकजुटता का आश्वासन दिया।
भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सर्वोपरि
सरकार ने स्पष्ट किया है कि उसकी प्राथमिकता खाड़ी देशों में रह रहे लगभग 90 लाख भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा है।
- कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS): पीएम मोदी ने सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति की बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें भारतीयों की सुरक्षा और संभावित निकासी (Evacuation) योजनाओं की समीक्षा की गई।
- ओमान में भारतीय नाविक की मौत: संघर्ष के दौरान ओमान के तट पर एक तेल टैंकर पर हुए हमले में एक भारतीय नागरिक की जान जाने की खबर ने भारत की चिंताएं और बढ़ा दी हैं।
विपक्ष के सवाल और कूटनीतिक संतुलन
जहाँ एक ओर कांग्रेस और विपक्षी दलों ने सरकार की शुरुआती चुप्पी को “मूक दर्शक” बने रहना बताया है, वहीं विशेषज्ञों का मानना है कि भारत ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ (Strategic Autonomy) बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। भारत के इजरायल के साथ गहरे रक्षा संबंध हैं, तो वहीं ईरान के साथ चाबहार पोर्ट और ऊर्जा सुरक्षा के जुड़े पुराने हित हैं।